Sarso ki top variety 2026 : सरसों की NO 1 वैरायटी 2026, Sarso ki kheti 2027

Sarso ki top variety 2026

रबी सीजन 2026 में सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए सही किस्म चुनना सबसे जरूरी काम है। अच्छी किस्म से पैदावार बढ़ती है, तेल की मात्रा ज्यादा मिलती है और रोग भी कम लगते हैं। इस साल नई उन्नत किस्मों ने किसानों का ध्यान खींचा है। सही जानकारी से आप अपनी जमीन और मौसम के हिसाब से बेहतरीन फसल ले सकते हैं।

2026 में सबसे आगे मानी जा रही नई किस्म

भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान भरतपुर ने 2025 में BPM (Q) 172 किस्म को आधिकारिक रूप से जारी किया है। इसे DRMRCI 172 भी कहा जाता है। यह किस्म समय पर बुवाई और सिंचाई वाले इलाकों के लिए खास बनाई गई है। इसमें औसत पैदावार करीब 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है। तेल की मात्रा लगभग 41.8 प्रतिशत है। फसल लगभग 131 दिन में पक जाती है। पौधे की ऊंचाई करीब 191 सेंटीमीटर रहती है। यह सफेद रतुआ रोग के प्रति मजबूत है और इसमें एरुसिक एसिड कम होता है जिससे तेल की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के जोन-3 वाले इलाकों के लिए यह बहुत उपयुक्त है।

दूसरी मजबूत किस्में जो क्षेत्र के हिसाब से टॉप हैं

हर जगह एक ही किस्म सबसे अच्छी नहीं होती। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में BPM 1825 किस्म अच्छी चल रही है। इसकी औसत पैदावार करीब 25 से 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। यह भी समय पर बुवाई और सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए है। गिरिराज किस्म पुरानी लेकिन भरोसेमंद है। इसमें दाने बड़े होते हैं और पैदावार 22 से 27 क्विंटल तक हो सकती है। आरएच-749 किस्म हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में लोकप्रिय है। कम पानी में भी अच्छी उपज देती है। राधिका किस्म देर से बुवाई वाले क्षेत्रों के लिए ठीक रहती है।

बुवाई का सही समय और तरीका

सरसों की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के पहले सप्ताह तक सबसे अच्छी मानी जाती है। खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई कर लें। बीज की मात्रा एक एकड़ में डेढ़ से दो किलो काफी है। लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें। बीज को बहुत गहरा न बोएं। बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूर करें ताकि रोग कम लगें।

पैदावार बढ़ाने के आसान उपाय

खेत में नमी सही रखें। पहली सिंचाई बुवाई के 25 से 30 दिन बाद करें। फूल आने और दाने भरने के समय पानी की खास जरूरत होती है। खाद का इस्तेमाल संतुलित करें। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश सही मात्रा में डालें। खरपतवार समय पर निकालें। कीट और रोग पर नजर रखें। माहू का प्रकोप हो तो तुरंत उपाय करें।

  • समय पर बुवाई करें ताकि ठंड का फायदा मिले
  • सही दूरी पर बोएं ताकि पौधे अच्छी तरह बढ़ सकें
  • बीज उपचार से रोगों से बचाव हो
  • सिंचाई और खाद का संतुलन बनाए रखें

पैदावार और तेल की तुलना

नीचे कुछ प्रमुख किस्मों की मुख्य बातें आसान तालिका में दी गई हैं।

किस्म का नामऔसत पैदावार (क्विंटल/हेक्टेयर)तेल की मात्रापकने का समय (दिन)उपयुक्त क्षेत्र
BPM (Q) 172करीब 2341.8%131राजस्थान, यूपी, एमपी, उत्तराखंड, बिहार
BPM 1825करीब 25-2640.6%145पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान
गिरिराज22-2739-42.6%137-153दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान
राधिका17-1840.7%131देर से बुवाई वाले क्षेत्र

ये आंकड़े औसत हैं। सही देखभाल और मौसम के हिसाब से पैदावार बदल सकती है।

बीज कहां से लें और सावधानी

प्रामाणिक बीज लेना बहुत जरूरी है। सरकारी संस्थान या विश्वसनीय स्रोत से ही बीज खरीदें। नकली बीज से नुकसान हो सकता है। अपनी जमीन की जांच करवा लें और स्थानीय कृषि अधिकारी से सलाह लें। जोन के हिसाब से किस्म चुनें तो फायदा ज्यादा होगा।

सरसों की खेती में सही किस्म चुनने से लागत कम और मुनाफा ज्यादा होता है। 2026 के रबी सीजन में BPM (Q) 172 जैसी नई किस्मों को अपनाकर किसान अच्छी पैदावार ले सकते हैं। अपनी मिट्टी, पानी और बुवाई के समय के हिसाब से फैसला करें। सही तरीके से खेती करने पर सरसों अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है।

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