रबी सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही किसान भाइयों ने अपने खेतों में सरसों की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। सरसों एक ऐसी नकदी फसल है जो कम पानी और कम लागत में किसानों को बंपर मुनाफा दे सकती है, बशर्ते उसकी बुवाई सही वैज्ञानिक तरीके से और उन्नत बीजों का चयन करके की जाए। इस साल अगर आप भी सरसों की खेती से रिकॉर्ड तोड़ पैदावार लेना चाहते हैं, तो आपको बुवाई के सबसे बेस्ट तरीके और इस समय बाजार में उपलब्ध टॉप वैरायटीज की पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है।
सरसों बुवाई का सबसे सही समय और तापमान
सरसों की फसल से बढ़िया अंकुरण और दमदार फुटाव लेने के लिए सबसे जरूरी चीज है सही समय पर बुवाई करना। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सरसों की बुवाई के लिए 1 अक्टूबर से लेकर 30 अक्टूबर तक का समय सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान मौसम का तापमान 25 डिग्री से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए, जो बीजों के बेहतर जमाव के लिए एकदम अनुकूल होता है। अगर आप सितंबर के आखिरी या अक्टूबर के शुरुआती दिनों में अगेती बुवाई करते हैं, तो फसल को बढ़ने के लिए पूरा समय मिलता है। बुवाई में बहुत ज्यादा देरी करने से बचना चाहिए क्योंकि देर से बोई गई फसल पर आगे चलकर कोहरे और रस चूसक कीटों (जैसे माहू या चेपा) का हमला होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
बुवाई का सबसे बेस्ट और वैज्ञानिक तरीका
खेत में बीजों को सीधे छिड़कने (छिटकवां विधि) के बजाय हमेशा कतारों यानी लाइनों में बुवाई करनी चाहिए। लाइन में बुवाई करने से हर पौधे को बराबर मात्रा में धूप, हवा और नमी मिलती है, जिससे पौधों का विकास बहुत अच्छा होता है।
- लाइन से लाइन की दूरी: बुवाई करते समय एक कतार से दूसरी कतार के बीच की दूरी कम से कम 30 से 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
- पौधे से पौधे की दूरी: कतार के अंदर एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
- बीज की गहराई: सरसों का बीज बहुत छोटा होता है, इसलिए इसे मिट्टी में केवल 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर ही बोना चाहिए। ज्यादा गहरा बोने से बीज सड़ सकते हैं या उनका अंकुरण रुक सकता है।
- बीज की मात्रा: एक एकड़ खेत के लिए लगभग 1.25 से 1.5 किलोग्राम उन्नत और उपचारित बीज बिल्कुल पर्याप्त होता है।
सरसों की खेती के लिए खाद का सही प्रबंधन
सरसों की फसल से बंपर पैदावार लेने के लिए संतुलित खाद देना बेहद जरूरी है। बुवाई के समय ही नाइट्रोजन और फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। सरसों एक तिलहन फसल है और सल्फर का इस्तेमाल करने से इसके दानों में तेल की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे मंडी में फसल का भारी दाम मिलता है।
| खाद का नाम | प्रति एकड़ जरूरी मात्रा | देने का सबसे सही समय |
|---|---|---|
| डीएपी (DAP) | 40 से 50 किलोग्राम | खेत की आखिरी जुताई और बुवाई के समय |
| सल्फर (सल्फेक्स/बेंटोनाइट) | 10 किलोग्राम | बुवाई के समय मिट्टी में मिलाना है |
| यूरिया (Nitrogen) | 35 से 40 किलोग्राम | पहली सिंचाई (बुवाई के 25-30 दिन बाद) के समय |
वर्ष 2026 के लिए सरसों की टॉप वैरायटी
इस साल बाजारों में कई ऐसी बेहतरीन हाइब्रिड किस्में उपलब्ध हैं जिन्होंने पिछले सालों में पैदावार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आप अपने क्षेत्र और मिट्टी के हिसाब से नीचे दी गई टॉप वैरायटीज में से किसी एक का चुनाव कर सकते हैं।
पायनियर 45S46 (Pioneer 45S46)
यह देश की सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद हाइब्रिड किस्मों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके दानों में तेल की मात्रा अन्य किस्मों के मुकाबले लगभग 2% ज्यादा होती है। यह अगेती बुवाई के लिए सबसे बढ़िया मानी जाती है। इसमें नीचे से ही शाखाएं निकलना शुरू हो जाती हैं जिससे फलियां बहुत ज्यादा लगती हैं। इसकी संभावित पैदावार 12 से 14 क्विंटल प्रति एकड़ तक देखी गई है। हालांकि, पकने के बाद इसकी कटाई में ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए वरना दाने झड़ने की समस्या आ सकती है।
क्रिस्टल प्रोएग्रो 5232 (Crystal Proagro 5232)
यह किस्म उन किसानों के लिए सबसे वरदान साबित हो रही है जिन्हें कटाई के समय मजदूर मिलने में देरी हो जाती है। पकने के बाद भी इस वैरायटी के दाने खेत में झड़ते नहीं हैं। इसमें तना गलन और पाले से लड़ने की गजब की रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है। इसका फुटाव शुरू से ही बहुत शानदार रहता है और किसान इसके जरिए प्रति एकड़ लगभग 12 से 13 क्विंटल तक की आसानी से पैदावार ले रहे हैं। इसके दानों में तेल की मात्रा करीब 41.8% तक पाई जाती है।
आरएच 725 (RH 725)
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित यह एक बेहद शानदार सरकारी किस्म है। इस वैरायटी का दाना काफी मोटा, वजनदार और चमकदार होता है, जिसकी वजह से मंडियों में व्यापारी इसे हाथों-हाथ अच्छे दामों पर खरीदते हैं। यह किस्म प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल तक का भारी उत्पादन देने की क्षमता रखती है और इसमें तेल की मात्रा 42 प्रतिशत तक पाई जाती है।
एडवांटा 414 (Advanta ADV 414)
कम पानी वाले क्षेत्रों और हल्की दोमट मिट्टी के लिए यह एक बहुत ही दमदार वैरायटी है। इस पौधे की ऊंचाई मध्यम होती है और इसकी हर शाखा फलियों से पूरी तरह लद जाती है। यह मौसम के उतार-चढ़ाव को आसानी से सहन कर लेती है और विपरीत परिस्थितियों में भी किसानों को एक स्थिर और बढ़िया मुनाफा कमा कर देती है।
सरसों की खेती में मोटी कमाई करने का सीधा फंडा यही है कि आप सही समय (अक्टूबर महीना) पर बुवाई करें, कतारों में बीज बोएं और सल्फर खाद का इस्तेमाल पक्का करें। इस साल पायनियर 45S46, प्रोएग्रो 5232 या आरएच 725 जैसी प्रमाणित और उन्नत हाइब्रिड किस्मों को अपने खेतों में लगाकर आप बहुत ही कम लागत में अपनी फसलों से रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा सकते हैं।

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