देश में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार पाने के लिए सिर्फ महंगा बीज खरीदना काफी नहीं है, बल्कि सही किस्म का चुनाव, समय पर बुवाई, संतुलित खाद और सही सिंचाई भी उतनी ही जरूरी हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR) ने उत्तर भारत के किसानों के लिए जरूरी सलाह जारी की है ताकि खेती की लागत कम हो और मुनाफा बढ़े।
1. क्षेत्र और मौसम के हिसाब से चुनें सही किस्में
विशेषज्ञों का कहना है कि किसान किसी भी किस्म के केवल अधिकतम पैदावार के दावे पर भरोसा न करें। अपने क्षेत्र की मिट्टी और पानी की उपलब्धता के आधार पर ही प्रमाणित बीज खरीदें:
- DBW 187 (करण वंदना): समय पर बुवाई और सिंचित क्षेत्रों के लिए बेस्ट। यह पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
- DBW 222 (करण नरेंद्र): इसका तना बेहद मजबूत होता है, जिससे तेज हवा में भी फसल गिरती नहीं है।
- DBW 303 (करण वैष्णवी): अगेती (जल्दी) बुवाई और अधिक उपजाऊ खेतों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।
- HD 3226: सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त। ICAR के अनुसार इसकी औसत उपज लगभग 57.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक देखी गई है।
2. नवंबर का महीना बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण
उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में सामान्य सिंचित गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर का पहला से चौथा सप्ताह सबसे सही समय माना जाता है। धान की कटाई के बाद किसानों को खेत तैयार करने में देरी नहीं करनी चाहिए। देर से बुवाई करने पर मार्च-अप्रैल में गर्मी बढ़ने के कारण गेहूं का दाना छोटा रह जाता है, जिससे पैदावार घट जाती है।
3. प्रति एकड़ बीज की सही मात्रा
सामान्य परिस्थितियों में प्रति एकड़ 40 से 50 किलोग्राम गेहूं के बीज की जरूरत होती है। हालांकि, बुवाई की विधि और समय के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, छिटकवां विधि की तुलना में सीड ड्रिल (Seed Drill) से बुवाई करना ज्यादा फायदेमंद है। इससे बीज समान दूरी और सही गहराई पर गिरता है, जिससे बीज की बर्बादी रुकती है और सभी पौधे अच्छे से उगते हैं।
4. मिट्टी की जांच के बिना अंधाधुंध न डालें यूरिया-डीएपी
खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलन होना जरूरी है। बिना हिसाब के यूरिया या डीएपी डालने से फसल जरूरत से ज्यादा घनी हो जाती है और उसके गिरने का खतरा बढ़ जाता है। बुवाई से पहले मिट्टी की जांच (Soil Test) जरूर कराएं। बुवाई के समय फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा दें, जबकि नाइट्रोजन (यूरिया) को दो से तीन बार में बांटकर दें।
5. पहली सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी
गेहूं की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद (क्रोन रूट इनिशिएशन स्टेज पर) करनी चाहिए। इस समय पौधों की जड़ें बन रही होती हैं। हल्की मिट्टी में सिंचाई जल्दी और भारी मिट्टी में नमी देखकर पानी दें। इसके अलावा शुरुआती दिनों में नियमित रूप से खेत की निगरानी करें और कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर ही सही खरपतवारनाशी (Weedicide) का छिड़काव करें। पत्तियों के पीले पड़ने पर तुरंत दवा न छिड़कें, पहले यह जांच लें कि यह किसी बीमारी (जैसे पीला रतुआ) के कारण है या पोषक तत्वों की कमी से।
विशेषज्ञों की सलाह: रबी सीजन 2026-27 में जोखिम को कम करने और सही मुनाफा कमाने के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या सरकारी कृषि विश्वविद्यालय से संपर्क करके ही प्रमाणित बीज और दवाइयां खरीदें।

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